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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Classic Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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संघर्ष और संकल्प - 6 By shiromani mathur

सात फेरे                       शिखा अपने भाई की गाड़ी में अपना व बच्चों का जरूरी सामान रखती जा रही थी । परंतु मन बहुत भारी था, 15 साल से वह इस घर से ,पति से, सास -ससुर से ,निभाते आ...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 12 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

लघुकथा - 1    स्वाभिमानी किसान   "नमस्कार मैनेजर साहब।" मैनेजर के चैंबर में घुसते हुए रामलाल बोला। "नमस्कार, आइए-आइए, रामलाल जी। बैठिए। बताइए क्या सेवा करूँ आपकी ?"...

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अन्तर्निहित - 64 By Vrajesh Shashikant Dave

[64]“सरिता जी, संसार की तीन अवस्थाएं हैं, उत्पत्ति – स्थिति – प्रलय। इन तीनों अवस्थाओं से संसार चक्र चलता रहता है। संसार के चलने के लिए हम जन्म लेते हैं, शरीर धारण करके शरीर के माध...

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नीला आकाश By Skp divine

नीला आकाशएक सपना, एक संघर्ष और अपनी पहचान पाने की कहानीसुबह का आसमान बिल्कुल साफ था। रात की बारिश के बाद बादलों के छोटे-छोटे टुकड़े अभी भी दूर क्षितिज पर तैर रहे थे। सूरज की हल्की...

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आँगन का दिया By Vandna Sharma

कहानी - आँगन का दियालेखिका - डॉ वंदना शर्मा अक्टूबर का महीना अपने साथ ऋतु-परिवर्तन लेकर आता है। प्रातः और सायं की वायु में एक हल्की सी शीतलता घुलने लगती है। दिन छोटे होने लगते हैं...

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सर्वगुण संपन्न बहु चाहिए By Vandna Sharma

शारदा देवी अस्सी साल की थीं, पर उनकी कमर आज भी सीधी थी और आवाज में वही रौब था जो चालीस साल पहले हुआ करता था। गली-मोहल्ले की औरतें उन्हें देखकर फुसफुसातीं, "शारदा देवी बेटों की माँ...

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समय की यात्रा By Vijay Erry

समय की यात्रासमय… एक अदृश्य नदी है जो कभी रुकती नहीं। कुछ लोग इसे सिर्फ जीते हैं, कुछ इसे मापते हैं, और कुछ… उसमें डूबकर खो जाते हैं।यह कहानी है आदित्य की — एक साधारण युवक की, जिसन...

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खंडहर बनी जिंदगी By Vandna Sharma

सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही चले जाते हैं। ये मानव इतनी जल्दी में क्यों रहते हैं, किसी के पास समय ही नहीं है ठहरकर किसी की बात स...

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मोह-माया By satish bhardwaj

श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान के शव को लकड़ियों पर रख दिया गया। एक बुजुर्ग बोले सामग्री रख मुँह अर छात्ति पै। मलखान के बेटे सुधीर न...

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राहें - 28 By shiromani mathur

गवाहीमैं सुबह से ही व्यस्त थी । घर के सारे काम मुझे ही निपटाने थे। क्योंकि पुत्रवधु कुछ दिनों सेमायके गई हुई थी। ऊपर से पति का बार - बार कोर्ट में गवाहो देने जाने का आग्रह , अच्छा...

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बंद कमरे की खिड़की By Subhan Khan

बंद कमरे की खिड़कीशहर के पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा मकान था। उस मकान की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा हमेशा बंद रहता था।उस कमरे के बारे में पड़ोस में तरह-तरह की बातें होती थीं। कोई कह...

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रिश्तों का बोझ By Skp divine

रिश्तों का बोझएक कहानी — जब रिश्ते सहारा बनने के बजाय बोझ बन जाएँशहर के एक पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा दो मंजिला मकान था। मकान बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों के स...

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रिश्ते की डोर By Skp divine

रिश्ते की डोरकभी-कभी रिश्ते खून से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, धैर्य और समझ से मजबूत होते हैं। कुछ रिश्ते दिखाई नहीं देते, फिर भी उनके बीच एक ऐसी अदृश्य डोर बंधी होती है, जो वर्षों...

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कागज की नाव By shrish sharma

कागज की नावबरसात का महीना था। दिल्ली में पिछले 7 दिन से लगातार बारिश हो रही थी। अभिमन्यु, उम्र 32 साल, एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क। रोज की तरह वो 8:32 की लोकल पकड़ने के लिए भाग रहा...

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जिस जीवन में तुम थे - 10 By SHREYA INDUSHREE

पाँच वर्ष बीत गए थे।समय के बारे में सबसे विचित्र बात यही है,जिस दिन हम टूटते हैं, उस दिन लगता है कि अब कुछ आगे नहीं बढ़ेगा।लेकिन समय रुकता नहीं।वह हमारी सहमति के बिना भी आगे बढ़ता...

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समय का कुआं By shrish sharma

अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं। और उसी बरगद की सबसे मोटी जड़ के ठीक नीच...

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एक आखिरी चिट्ठी By shrish sharma

एक आखिरी चिट्ठी - उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे - मोहनपुरा में, एक बहुत पुराना डाकघर था। उस डाकघर की लाल ईंटों पर बरसात के पानी के निशान थे, और उसके बाहर एक बूढ़ा पीपल का पेड़ थ...

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સ્કૂલની યાદો By sejan agariya

એ તો હવે ખબર પડી કે સાચી મજા તો બાળપણમાં જ હતી એ સવારની સ્કૂલની ઠંડી મન ન હોય તો પણ સ્કૂલે જવું પડે અમુક વાર પપ્પા ના માર ખબર પડે તો અમુક વાર સરના માર ખાવો પડે અને હા એ વાત તો કદી...

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ले डूबा इश्क़ तेरा। - 2 By Radha

आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। ओर मुझे देर हों गई तो में तो गई काम से। वैसे भी कोलेज कब की शुरू हो चुकी है, में ही लेट हू। दो दिन पहले जब कोलेज के मैनेजमेंट से फि के बारे में मेरी ब...

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पवित्र बहु - 18 By archana

एक दिन दिव्यम चित्रा को स्कूटी चलाना सिखा रहा था। चित्रा अभी भी पूरी तरह आत्मविश्वास से स्कूटी नहीं चला पाती थी, इसलिए दिव्यम उसके साथ-साथ चल रहा था और बार-बार उसे समझा रहा था—“धीर...

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आखिरी किताब By shrish sharma

"आख़िरी किताब" - एक साहित्यिक कहानीभैरवपुर का पुस्तकालय अब कोई नहीं जाता था।एक ज़माना था जब उसकी दीवारें नए अखबारों की खुशबू से महकती थीं, जब सुबह-सुबह कॉलेज के लड़के साइकिल पर आकर...

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पति-पत्नी का रिश्ता: विश्वास, समझ और साथ की सबसे मजबूत डोर By Skp divine

पति-पत्नी का रिश्ता: विश्वास, समझ और साथ की सबसे मजबूत डोरदुनिया में अनेक रिश्ते होते हैं—माता-पिता का, भाई-बहन का, मित्रता का और संतान का। हर रिश्ते का अपना महत्व है, लेकिन पति-पत...

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बंद कमरे का रहस्य By Skp divine

बंद कमरे का रहस्यभाग 1: रहस्यमयी मकानगाँव के किनारे एक पुराना मकान था।पिछले बीस वर्षों से वह बंद पड़ा था।लोग कहते थे कि हर पूर्णिमा की रात उस मकान के अंदर से पियानो की आवाज़ आती थी...

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जिल्लत By Jeetendra

कमला सुबह चार बजे उठी थी। रात भर की बारिश ने मिट्टी की दीवारों में नमी भर दी थी, पर वह इस आदी थी। चूल्हे पर पानी चढ़ाया, बचे हुए आटे से दो रोटियाँ बनाईं। एक उसने खुद खाई, दूसरी काग...

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संघर्ष और संकल्प - 6 By shiromani mathur

सात फेरे                       शिखा अपने भाई की गाड़ी में अपना व बच्चों का जरूरी सामान रखती जा रही थी । परंतु मन बहुत भारी था, 15 साल से वह इस घर से ,पति से, सास -ससुर से ,निभाते आ...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 12 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

लघुकथा - 1    स्वाभिमानी किसान   "नमस्कार मैनेजर साहब।" मैनेजर के चैंबर में घुसते हुए रामलाल बोला। "नमस्कार, आइए-आइए, रामलाल जी। बैठिए। बताइए क्या सेवा करूँ आपकी ?"...

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नीला आकाश By Skp divine

नीला आकाशएक सपना, एक संघर्ष और अपनी पहचान पाने की कहानीसुबह का आसमान बिल्कुल साफ था। रात की बारिश के बाद बादलों के छोटे-छोटे टुकड़े अभी भी दूर क्षितिज पर तैर रहे थे। सूरज की हल्की...

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आँगन का दिया By Vandna Sharma

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सर्वगुण संपन्न बहु चाहिए By Vandna Sharma

शारदा देवी अस्सी साल की थीं, पर उनकी कमर आज भी सीधी थी और आवाज में वही रौब था जो चालीस साल पहले हुआ करता था। गली-मोहल्ले की औरतें उन्हें देखकर फुसफुसातीं, "शारदा देवी बेटों की माँ...

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समय की यात्रा By Vijay Erry

समय की यात्रासमय… एक अदृश्य नदी है जो कभी रुकती नहीं। कुछ लोग इसे सिर्फ जीते हैं, कुछ इसे मापते हैं, और कुछ… उसमें डूबकर खो जाते हैं।यह कहानी है आदित्य की — एक साधारण युवक की, जिसन...

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खंडहर बनी जिंदगी By Vandna Sharma

सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही चले जाते हैं। ये मानव इतनी जल्दी में क्यों रहते हैं, किसी के पास समय ही नहीं है ठहरकर किसी की बात स...

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मोह-माया By satish bhardwaj

श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान के शव को लकड़ियों पर रख दिया गया। एक बुजुर्ग बोले सामग्री रख मुँह अर छात्ति पै। मलखान के बेटे सुधीर न...

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बंद कमरे की खिड़की By Subhan Khan

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रिश्तों का बोझ By Skp divine

रिश्तों का बोझएक कहानी — जब रिश्ते सहारा बनने के बजाय बोझ बन जाएँशहर के एक पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा दो मंजिला मकान था। मकान बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों के स...

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रिश्ते की डोर By Skp divine

रिश्ते की डोरकभी-कभी रिश्ते खून से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, धैर्य और समझ से मजबूत होते हैं। कुछ रिश्ते दिखाई नहीं देते, फिर भी उनके बीच एक ऐसी अदृश्य डोर बंधी होती है, जो वर्षों...

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कागज की नाव By shrish sharma

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समय का कुआं By shrish sharma

अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं। और उसी बरगद की सबसे मोटी जड़ के ठीक नीच...

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एक आखिरी चिट्ठी By shrish sharma

एक आखिरी चिट्ठी - उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे - मोहनपुरा में, एक बहुत पुराना डाकघर था। उस डाकघर की लाल ईंटों पर बरसात के पानी के निशान थे, और उसके बाहर एक बूढ़ा पीपल का पेड़ थ...

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એ તો હવે ખબર પડી કે સાચી મજા તો બાળપણમાં જ હતી એ સવારની સ્કૂલની ઠંડી મન ન હોય તો પણ સ્કૂલે જવું પડે અમુક વાર પપ્પા ના માર ખબર પડે તો અમુક વાર સરના માર ખાવો પડે અને હા એ વાત તો કદી...

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आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। ओर मुझे देर हों गई तो में तो गई काम से। वैसे भी कोलेज कब की शुरू हो चुकी है, में ही लेट हू। दो दिन पहले जब कोलेज के मैनेजमेंट से फि के बारे में मेरी ब...

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एक दिन दिव्यम चित्रा को स्कूटी चलाना सिखा रहा था। चित्रा अभी भी पूरी तरह आत्मविश्वास से स्कूटी नहीं चला पाती थी, इसलिए दिव्यम उसके साथ-साथ चल रहा था और बार-बार उसे समझा रहा था—“धीर...

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पति-पत्नी का रिश्ता: विश्वास, समझ और साथ की सबसे मजबूत डोर By Skp divine

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बंद कमरे का रहस्य By Skp divine

बंद कमरे का रहस्यभाग 1: रहस्यमयी मकानगाँव के किनारे एक पुराना मकान था।पिछले बीस वर्षों से वह बंद पड़ा था।लोग कहते थे कि हर पूर्णिमा की रात उस मकान के अंदर से पियानो की आवाज़ आती थी...

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कमला सुबह चार बजे उठी थी। रात भर की बारिश ने मिट्टी की दीवारों में नमी भर दी थी, पर वह इस आदी थी। चूल्हे पर पानी चढ़ाया, बचे हुए आटे से दो रोटियाँ बनाईं। एक उसने खुद खाई, दूसरी काग...

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