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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Classic Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cu...Read More


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Featured Books
  • समय का कुआं

    अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक...

  • एक आखिरी चिट्ठी

    एक आखिरी चिट्ठी - उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे - मोहनपुरा में, एक बहुत पुरान...

माया, मुकद्दर और अनंत अस्तित्व की खोज By Rudra Rudrani

सूर्य की अंतिम गर्मीएक दार्शनिक रहस्यगाथाप्रस्तावना — वह चेहरा जो दो बार दिखाई दियाआसमान बादलों से ढका हुआ था। कुछ देर पहले हुई हल्की बारिश ने सड़क की धूल को मिट्टी की सुगंध में बद...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 19 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ  - 191. क्वालिटी टाइम  "दादा जी, आज जबकि संयुक्त परिवार लगातार कम होते जा रहे हैं, वैसे परिवेश में एक ही छत के नीचे चार पीढ़ी के 45 लोगों का आपका...

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ऑटो नम्बर 9288 By Vandna Sharma

नवम्बर माह की गुनगुनी धूप थी। ठंड अभी इतनी भी नहीं हुई थी कि ठंड से ठिठुरा जाए। सुबह-सुबह मौसम ठंडा-सा हो रहा था। दिल्ली में वैसे भी कम ठंड पड़ती है। बस दिसम्बर और जनवरी, दो माह के...

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संघर्ष और संकल्प - 6 By shiromani mathur

सात फेरे                       शिखा अपने भाई की गाड़ी में अपना व बच्चों का जरूरी सामान रखती जा रही थी । परंतु मन बहुत भारी था, 15 साल से वह इस घर से ,पति से, सास -ससुर से ,निभाते आ...

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अन्तर्निहित - 64 By Vrajesh Shashikant Dave

[64]“सरिता जी, संसार की तीन अवस्थाएं हैं, उत्पत्ति – स्थिति – प्रलय। इन तीनों अवस्थाओं से संसार चक्र चलता रहता है। संसार के चलने के लिए हम जन्म लेते हैं, शरीर धारण करके शरीर के माध...

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नीला आकाश By Skp divine

नीला आकाशएक सपना, एक संघर्ष और अपनी पहचान पाने की कहानीसुबह का आसमान बिल्कुल साफ था। रात की बारिश के बाद बादलों के छोटे-छोटे टुकड़े अभी भी दूर क्षितिज पर तैर रहे थे। सूरज की हल्की...

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आँगन का दिया By Vandna Sharma

कहानी - आँगन का दियालेखिका - डॉ वंदना शर्मा अक्टूबर का महीना अपने साथ ऋतु-परिवर्तन लेकर आता है। प्रातः और सायं की वायु में एक हल्की सी शीतलता घुलने लगती है। दिन छोटे होने लगते हैं...

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सर्वगुण संपन्न बहु चाहिए By Vandna Sharma

शारदा देवी अस्सी साल की थीं, पर उनकी कमर आज भी सीधी थी और आवाज में वही रौब था जो चालीस साल पहले हुआ करता था। गली-मोहल्ले की औरतें उन्हें देखकर फुसफुसातीं, "शारदा देवी बेटों की माँ...

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समय की यात्रा By Vijay Erry

समय की यात्रासमय… एक अदृश्य नदी है जो कभी रुकती नहीं। कुछ लोग इसे सिर्फ जीते हैं, कुछ इसे मापते हैं, और कुछ… उसमें डूबकर खो जाते हैं।यह कहानी है आदित्य की — एक साधारण युवक की, जिसन...

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खंडहर बनी जिंदगी By Vandna Sharma

सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही चले जाते हैं। ये मानव इतनी जल्दी में क्यों रहते हैं, किसी के पास समय ही नहीं है ठहरकर किसी की बात स...

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मोह-माया By satish bhardwaj

श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान के शव को लकड़ियों पर रख दिया गया। एक बुजुर्ग बोले सामग्री रख मुँह अर छात्ति पै। मलखान के बेटे सुधीर न...

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राहें - 28 By shiromani mathur

गवाहीमैं सुबह से ही व्यस्त थी । घर के सारे काम मुझे ही निपटाने थे। क्योंकि पुत्रवधु कुछ दिनों सेमायके गई हुई थी। ऊपर से पति का बार - बार कोर्ट में गवाहो देने जाने का आग्रह , अच्छा...

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बंद कमरे की खिड़की By Subhan Khan

बंद कमरे की खिड़कीशहर के पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा मकान था। उस मकान की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा हमेशा बंद रहता था।उस कमरे के बारे में पड़ोस में तरह-तरह की बातें होती थीं। कोई कह...

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रिश्तों का बोझ By Skp divine

रिश्तों का बोझएक कहानी — जब रिश्ते सहारा बनने के बजाय बोझ बन जाएँशहर के एक पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा दो मंजिला मकान था। मकान बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों के स...

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रिश्ते की डोर By Skp divine

रिश्ते की डोरकभी-कभी रिश्ते खून से नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, धैर्य और समझ से मजबूत होते हैं। कुछ रिश्ते दिखाई नहीं देते, फिर भी उनके बीच एक ऐसी अदृश्य डोर बंधी होती है, जो वर्षों...

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कागज की नाव By shrish sharma

कागज की नावबरसात का महीना था। दिल्ली में पिछले 7 दिन से लगातार बारिश हो रही थी। अभिमन्यु, उम्र 32 साल, एक सरकारी दफ्तर में क्लर्क। रोज की तरह वो 8:32 की लोकल पकड़ने के लिए भाग रहा...

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जिस जीवन में तुम थे - 10 By SHREYA INDUSHREE

पाँच वर्ष बीत गए थे।समय के बारे में सबसे विचित्र बात यही है,जिस दिन हम टूटते हैं, उस दिन लगता है कि अब कुछ आगे नहीं बढ़ेगा।लेकिन समय रुकता नहीं।वह हमारी सहमति के बिना भी आगे बढ़ता...

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समय का कुआं By shrish sharma

अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं। और उसी बरगद की सबसे मोटी जड़ के ठीक नीच...

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एक आखिरी चिट्ठी By shrish sharma

एक आखिरी चिट्ठी - उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे - मोहनपुरा में, एक बहुत पुराना डाकघर था। उस डाकघर की लाल ईंटों पर बरसात के पानी के निशान थे, और उसके बाहर एक बूढ़ा पीपल का पेड़ थ...

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સ્કૂલની યાદો By sejan agariya

એ તો હવે ખબર પડી કે સાચી મજા તો બાળપણમાં જ હતી એ સવારની સ્કૂલની ઠંડી મન ન હોય તો પણ સ્કૂલે જવું પડે અમુક વાર પપ્પા ના માર ખબર પડે તો અમુક વાર સરના માર ખાવો પડે અને હા એ વાત તો કદી...

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ले डूबा इश्क़ तेरा। - 2 By Radha

आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। ओर मुझे देर हों गई तो में तो गई काम से। वैसे भी कोलेज कब की शुरू हो चुकी है, में ही लेट हू। दो दिन पहले जब कोलेज के मैनेजमेंट से फि के बारे में मेरी ब...

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माया, मुकद्दर और अनंत अस्तित्व की खोज By Rudra Rudrani

सूर्य की अंतिम गर्मीएक दार्शनिक रहस्यगाथाप्रस्तावना — वह चेहरा जो दो बार दिखाई दियाआसमान बादलों से ढका हुआ था। कुछ देर पहले हुई हल्की बारिश ने सड़क की धूल को मिट्टी की सुगंध में बद...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 19 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ  - 191. क्वालिटी टाइम  "दादा जी, आज जबकि संयुक्त परिवार लगातार कम होते जा रहे हैं, वैसे परिवेश में एक ही छत के नीचे चार पीढ़ी के 45 लोगों का आपका...

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ऑटो नम्बर 9288 By Vandna Sharma

नवम्बर माह की गुनगुनी धूप थी। ठंड अभी इतनी भी नहीं हुई थी कि ठंड से ठिठुरा जाए। सुबह-सुबह मौसम ठंडा-सा हो रहा था। दिल्ली में वैसे भी कम ठंड पड़ती है। बस दिसम्बर और जनवरी, दो माह के...

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संघर्ष और संकल्प - 6 By shiromani mathur

सात फेरे                       शिखा अपने भाई की गाड़ी में अपना व बच्चों का जरूरी सामान रखती जा रही थी । परंतु मन बहुत भारी था, 15 साल से वह इस घर से ,पति से, सास -ससुर से ,निभाते आ...

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अन्तर्निहित - 64 By Vrajesh Shashikant Dave

[64]“सरिता जी, संसार की तीन अवस्थाएं हैं, उत्पत्ति – स्थिति – प्रलय। इन तीनों अवस्थाओं से संसार चक्र चलता रहता है। संसार के चलने के लिए हम जन्म लेते हैं, शरीर धारण करके शरीर के माध...

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नीला आकाश By Skp divine

नीला आकाशएक सपना, एक संघर्ष और अपनी पहचान पाने की कहानीसुबह का आसमान बिल्कुल साफ था। रात की बारिश के बाद बादलों के छोटे-छोटे टुकड़े अभी भी दूर क्षितिज पर तैर रहे थे। सूरज की हल्की...

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शारदा देवी अस्सी साल की थीं, पर उनकी कमर आज भी सीधी थी और आवाज में वही रौब था जो चालीस साल पहले हुआ करता था। गली-मोहल्ले की औरतें उन्हें देखकर फुसफुसातीं, "शारदा देवी बेटों की माँ...

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समय की यात्रा By Vijay Erry

समय की यात्रासमय… एक अदृश्य नदी है जो कभी रुकती नहीं। कुछ लोग इसे सिर्फ जीते हैं, कुछ इसे मापते हैं, और कुछ… उसमें डूबकर खो जाते हैं।यह कहानी है आदित्य की — एक साधारण युवक की, जिसन...

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खंडहर बनी जिंदगी By Vandna Sharma

सुनो! सुनो! कब से इंतजार में बैठा हूँ अपनी व्यथा सुनाने को। सब राही बिना रुके ही चले जाते हैं। ये मानव इतनी जल्दी में क्यों रहते हैं, किसी के पास समय ही नहीं है ठहरकर किसी की बात स...

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मोह-माया By satish bhardwaj

श्मशान घाट पर भीड़ लगी थी। मलखान का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अर्थी से मलखान के शव को लकड़ियों पर रख दिया गया। एक बुजुर्ग बोले सामग्री रख मुँह अर छात्ति पै। मलखान के बेटे सुधीर न...

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गवाहीमैं सुबह से ही व्यस्त थी । घर के सारे काम मुझे ही निपटाने थे। क्योंकि पुत्रवधु कुछ दिनों सेमायके गई हुई थी। ऊपर से पति का बार - बार कोर्ट में गवाहो देने जाने का आग्रह , अच्छा...

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बंद कमरे की खिड़की By Subhan Khan

बंद कमरे की खिड़कीशहर के पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा मकान था। उस मकान की दूसरी मंज़िल पर एक कमरा हमेशा बंद रहता था।उस कमरे के बारे में पड़ोस में तरह-तरह की बातें होती थीं। कोई कह...

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रिश्तों का बोझ By Skp divine

रिश्तों का बोझएक कहानी — जब रिश्ते सहारा बनने के बजाय बोझ बन जाएँशहर के एक पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा दो मंजिला मकान था। मकान बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले लोगों के स...

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कागज की नाव By shrish sharma

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समय का कुआं By shrish sharma

अध्याय 1: बरगदपुर का वो कुआँबरगदपुर। नाम से ही पता चलता है, गाँव के बीचों-बीच एक विशाल बरगद का पेड़ था, जिसकी जड़ें दूर-दूर तक फैली हुई थीं। और उसी बरगद की सबसे मोटी जड़ के ठीक नीच...

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एक आखिरी चिट्ठी - उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे - मोहनपुरा में, एक बहुत पुराना डाकघर था। उस डाकघर की लाल ईंटों पर बरसात के पानी के निशान थे, और उसके बाहर एक बूढ़ा पीपल का पेड़ थ...

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સ્કૂલની યાદો By sejan agariya

એ તો હવે ખબર પડી કે સાચી મજા તો બાળપણમાં જ હતી એ સવારની સ્કૂલની ઠંડી મન ન હોય તો પણ સ્કૂલે જવું પડે અમુક વાર પપ્પા ના માર ખબર પડે તો અમુક વાર સરના માર ખાવો પડે અને હા એ વાત તો કદી...

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ले डूबा इश्क़ तेरा। - 2 By Radha

आज मेरे कॉलेज का पहला दिन है। ओर मुझे देर हों गई तो में तो गई काम से। वैसे भी कोलेज कब की शुरू हो चुकी है, में ही लेट हू। दो दिन पहले जब कोलेज के मैनेजमेंट से फि के बारे में मेरी ब...

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